Friday, 14 August 2026

रायपुर । फेसबुक के जरिए महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाकर ठगी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह के एक विदेशी नागरिक और एक महिला को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे. मामला रायपुर के सिविल लाइन थाने का है ।
मिली जानकारी के अनुसार यूके के व्यक्ति के नाम पर फ़र्ज़ी आईडी बनाकर महिला को झांसे में लिया था. युवक फेसबुक के माध्यम से चैट कर धीरे-धीरे महिला का विश्वास और मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था. इसके साथ ही महिला का फोटो और वीडियो भी हासिल कर लिया था. जिसके बाद महिला से शादी कर ब्रिटेन ले जाने का झांसा देकर 9 लाख 33 हजार रुपए से अधिक पैसे अपने खाते में ले चुका था ।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली में टीम ने कैम्प करते हुए लगातार 7 दिन तक अभियान चलाकर गिरोह के 2 सदस्यों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने आरोपियों के पास से 3 लैपटॉप, 4 नग मोबाइल फोन, 1 पासपोर्ट, 1 पेन ड्राईव, 3 पासबुक, आधार कार्ड एवं पेन कार्ड जब्त किया है. इससे पहले भी अब तक सैकड़ों महिलाओं को ये दोनों अपना शिकार बना चुके है. महिला आरोपी लिण्डा मणिपुर की रहने वाली है. और युवक चार्ली मगाने फ्रांज सीन नाईजीरियन नागरिक है. दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे और मिलकर ठगी की घटना को अंजाम देते थे. अभी रायपुर पुलिस ने दोनों को रिमांड पर जेल में रखा है ।

रायपुर ।  लोकसभा के पहले चुनाव के साथ अस्तित्व में आए रायपुर संसदीय क्षेत्र का न केवल प्रदेश के बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास में एक अहम स्थान है. इस सीट पर आजादी के समय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे आचार्य कृपलानी ने चुनाव लड़ा था, तो यहां से चुनाव जीतकर समाजवादी नेता पुरुषोत्तम लाल कौशिक ने भी अपनी राष्ट्रीय पटल पर पहचान बनाई. यहां से निर्वाचित कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल का आपातकाल के दौरान और बाद में भी राष्ट्रीय राजनीति में दबदबा रहा. वहीं गांधीवादी और किसान मजदूर आंदोलन के प्रणेता केयूर भूषण भी इसी रायपुर संसदीय क्षेत्र से दो बार सांसद रहे ।
रायपुर संसदीय क्षेत्र का अस्तित्व 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में ही आ गया था. शुरुआती दौर में कांग्रेस का इस संसदीय क्षेत्र में दबदबा रहा. स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आजादी से लेकर 1971 तक हुए चुनावों में कांग्रेस ने एकतरफा जीत हासिल की. केवल विजयी प्रत्याशियों के नाम बदलते गए. द्वि सदस्यीय इस संसदीय क्षेत्र में पहले चुनाव में भूपेंद्र नाथ मिश्रा के साथ मिनीमाता अगमदास गुरु चुनीं गईं. 1957 में हुए दूसरे चुनाव में राजा बिरेंद्र बहादुर सिंग के साथ रानी केशर कुमारी देवी चुनीं गईं. 1962 में हुए तीसरे चुनाव में रानी केशर कुमारी देवी के साथ श्याम कुमारी देवी सांसद के रूप में चुनी गईं ।
महात्मा गांधी के साथ आचार्य कृपलानी
आचार्य कृपलानी को खानी पड़ी शिकस्त
एक सदस्यीय सीट होने के बाद 1967 में हुए चुनाव में कांग्रेस के लखनलाल गुप्ता ने जीत हासिल की. उन्होंने 1947 में भारत की आजादी के समय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे जेबी कृपलानी (आचार्य कृपलानी) को पराजित किया. कृपलानी कांग्रेस से अलग होकर जन कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर खड़े थे. इसके बाद 1971 में हुए चुनाव में परिदृश्य बदल गया था. अबकी बार मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल के पुत्र विद्याचरण शुक्ल ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उतरे और जनसंघ के प्रत्याशी बाबूराव पटेल को 84 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया ।
आपातकाल का वीसी ने झेला गुस्सा
इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री के तौर पर आपातकाल के दौरान अहम भूमिका निभाने वाले विद्याचरण शुक्ल भी आपातकाल को लेकर लोगों के गुस्से से बच नहीं पाए और 1977 में हुए चुनाव में लोकदल के प्रत्याशी के तौर पर खड़े पुरुषोत्तम लाल कौशिक से 85 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से पराजित हुए. 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े रहे गांधीवादी केयूर भूषण ने स्वतंत्र प्रत्याशी के तौर पर लड़ रहे पवन दीवान को पराजित किया. 1984 में हुए चुनाव में केयूर भूषण ने फिर से जीत हासिल की, इस बार उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी रमेश बैस को एक लाख से ज्यादा मतों से पराजित किया ।
बैस की जीत के साथ बन गया भाजपा का गढ़
1989 में हुए लोकसभा चुनाव में रमेश बैस ने कांग्रेस प्रत्याशी केयूर भूषण को लगभग 90 हजार मतों के अंतर से पराजित कर भाजपा का खाता खोला. 1991 में हुए चुनाव में कांग्रेस में वापसी करने वाले विद्याचरण शुक्ल ने रमेश बैस को हजार से भी कम मतों के अंतर से पराजित किया. लेकिन इसके बाद हुए चुनावों में रमेश बैस ने क्षेत्र पर मानो एक तरह से एकाधिकार जमा लिया हो. 1996 में हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के धनेंद्र साहू को, 1998 में हुए चुनाव में विद्याचरण शुक्ल को, 2004 में श्यामाचरण शुक्ल को सवा लाख से भी ज्यादा मतों के अंतर से पराजित किया ।
भाजपा ने बैस के स्थान पर सोनी पर लगाया दांव
2009 के चुनाव में रमेश बैस ने भूपेश बघेल को 57 हजार मतों के अंतर से तो 2014 के चुनाव में कांग्रेस के सत्यनारायण शर्मा को करीबन पौने दो लाख मतों के अंतर से पराजित किया. लेकिन 2018 में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भाजपा ने छत्तीसगढ़ के सभी 10 सांसदों की टिकट काट नए प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. 2019 में भाजपा ने सुनील सोनी पर दांव लगाया है, वहीं कांग्रेस ने अबकी बार रायपुर महापौर प्रमोद दुबे को मैदान पर उतारा है. रायपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नौ सीटों में से बलौदाबाजार में जनता कांग्रेस, भाटापारा में भाजपा, धरसींवा में कांग्रेस, रायपुर ग्रामीण में कांग्रेस, रायपुर पश्चिम में कांग्रेस, रायपुर दक्षिण में भाजपा, रायपुर शहर में कांग्रेस और अभनपुर में भी कांग्रेस के विधायक हैं ।

रायपुर ।  अगर आप इंडिगो फ्लाइट से यात्रा करते हैं तो ये वीडियो आपके लिए ही है. क्योंकि कहीं यात्रा के दौरान आपके साथ ऐसा कुछ घटित न हो जाए. इंडिगो विमान सेवा का एक सच सामने आया है जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है ।
वीडियो में लोग मच्छरो से परेशान दिख रहे हैं एयरहोस्टेज भी मच्छरों को भगाने का भरसक प्रयास कर रही हैं . हर कोई यात्री मच्छरों के इस आतंक से परेशान है लेकिन कोई क्या कर सकता है ।
वीडियो कहां का है इसकी कोई जानकारी तो नहीं है लेकिन जिस तरह से लोग मच्छरों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे इंडिगो फ्लाइट सेवा पर कई सवालिया निशान उठ खड़े हुए हैं ।

रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में चल रही केन्द्र सरकार की योजनाओं को लेकर एक बार फिर पत्र लिखा है. बघेल ने इस दफा पीएम मोदी को पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने राज्य में संचालित स्टैण्डअप इंडिया योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को सरल बनाने कहा है ।
पत्र में भूपेश ने योजना का जिक्र करते हुए लिखा है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तथा महिला वर्ग में उद्यमिता का विकास करने के लिए भारत सरकार द्वारा 15 अगस्त 2015 को स्टैण्डअप इडिया योजना प्रारंभ की गई है. इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित व्यवसायिक बैक की प्रत्येक शाखा को 01 अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति उद्यमी और 01 महिला उद्यमी को विनिर्माण क्षेत्र या व्यवसाय में नया उद्यम प्रारंभ करने के लिए रू 10.00 लाख से रू 1.00 करोड़ तक का ऋण दिया जाना अपेक्षित है ।
भारत सरकार द्वारा उपरोक्तानुसार निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति के लिए छत्तीसगढ़ में रिथत बैंक शाखाओं को वर्ष 2016-17, 2017-18 एवं वर्ष 2018-19 के लिए क्रमशः 4300, 4300 तथा 4800 प्रकरणों में ऋण वितरित करना था. इस लक्ष्य के विरुद्ध अभी तक केवल 1870 प्रकरण (रु. 438.35 करोड़) स्वीकृत किए गए हैं तथा केवल 1279 प्रकरणों में (रू, 160.29 करोड़) पर ऋण वितरण किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई हैं. यह अत्यल्प प्रगति भी बैंक शाखाओं से राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के निरन्तर अनुसरण एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी में लगातार चिन्ता व्यक्त करने के बाद प्राप्त की जा सकी है. इससे यह स्पष्ट है कि भारत सरकार की इस फ्लैगशिप योजना के क्रियान्वयन के प्रति राज्य के बैंकों में उत्साह का अभाव है ।
अतः आपसे अनुरोध है कि यथोचित हस्तक्षेप कर प्रक्रिया में सरलीकरण हेतु संबंधितों को निर्देश देने का कष्ट करें ताकि नये वित्तीय वर्ष में छत्तीसगढ़ राज्य में स्टैण्डअप इंडिया का लक्ष्य प्राप्त हो सके एवं राज्य के अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा महिला वर्ग के नवोदित उद्यमी उद्योग प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित हो ।

R.O.NO. 13259/132
  • R.O.NO.13129/146 "
  • R.O.NO.13259/132 " B

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