रायपुर । छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की जीत ने कांग्रेस में लोकसभा चुनाव के दावेदारों की लंबी लाइन कर दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष भी हैं, इसलिए उन पर न केवल सूची छोटी कराने की जिम्मेदारी है, बल्कि उन पर अधिक से अधिक सीटों पर पार्टी को जिताने का जिम्मा भी है। पूरा खेल प्रत्याशी चयन पर ही टिका होगा। यह बात उन्हें पता है, इसलिए सूची छोटी करना, बघेल के लिए बड़ी चुनौती है।
हर सीट पर 17 से 20 दावेदार
विधानसभा चुनाव में बम्पर जीत से नेताओं को लग रहा है कि प्रदेश में कांग्रेस की लहर है। चुनाव में टिकट किसे भी दे दिया जाए, वह जीत जाएगा। यही वजह है कि हर लोकसभा सीट से 17 से 20 दावेदारों का नाम सामने आ गया है। दूसरी तरफ, पार्टी के वरिष्ठ नेता सभी 11 लोकसभा सीटों पर जीत का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी पता है कि लोकसभा चुनाव की परिस्थितियां विधानसभा चुनाव से अलग होती हैं। छत्तीसगढ़ बनने के बाद यहां हुए तीन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हर बार केवल एक-एक सीट से संतुष्ट होना पड़ा है।
संतुष्ट करना बड़ी चुनौती
11 सीटों के लिए केवल एक-एक नाम तय करना बड़ी चुनौती है। नाम फाइन करने के लिए न केवल मंत्रियों, विधायकों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को संतुष्ट करना होगा, बल्कि बाकी दावेदारों को भी समझाना होगा, ताकि सूची आने के बाद दिक्कत न हो। मुख्यमंत्री के पास सूची छोटी करने के लिए समय भी कम है। प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने उनके समेत चुनाव समिति के सदस्यों को सात मार्च को दिल्ली बुलाया है। पुनिया पहले समिति के अध्यक्ष व सदस्यों से स्क्रूटनी वाली सूची मांगेगे। उसके बाद ही वे आगे चर्चा शुरू करेंगे।



रायपुर । झीरम कांड में मारे गए बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा के बेटे आशीष कर्मा को डिप्टी कलेक्टर बनाने पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल आ गया है। पूर्व कलेक्टर और भाजपा नेता ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया पर चार सवाल किये हैं। चौधरी ने कहा, मैं महेन्द्र कर्मा का बहुत सम्मान करता हूं। कर्मा के बाद उनके परिवार से विधायक रहे, नगर पंचायत अध्यक्ष हैं, जिला पंचायत में भी प्रतिनिधित्व है, लोकसभा में भी उनके परिवार से चुनाव लड़ा गया। यह सब अपनी जगह है, लेकिन अब उनके एक पुत्र को कांग्रेस सरकार ने सीधा डिप्टी कलेक्टर बना दिया।
रायपुर । पुलिस विभाग के एमटी पूल शाखा में समीर और खालसा ट्रैवल्स द्वारा गाड़ी लगाकर लाखों के फर्जीवाड़े में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ट्रैवल्स संचालक बगैर एमटीओ के परमिशन खुद रजिस्टर खरीदे थे और उस पर गाड़ी का मीटर दर्ज करते थे।
रायपुर । प्रदेश के छात्र हिंदी संख्याओं को भूल रहे हैं। वे न केवल हिंदी संख्या लिखने और पहचानने में अक्षम होते जा रहे हैं, बल्कि बड़े अंकों को हिंछी में उच्चारित भी नीं रक पा रहे। हिंदी कैलेंडर, पुरानी किताबों में दर्ज हिंदी अंकों को वे समझ भी नहीं पा रहे। विस्मृत हो रही हिंदी को देखते हुए इस सत्र से छात्रों को हिंदी के अंक अर्थात देवनागरी लिपि के अंक पढ़ाए जाने की तैयारी है।
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